कौन सी साड़ी पहनूं

कौन सी साड़ी पहनूं
उन दिनों
मेरे पास केवल यही विकल्प थे।
घर की देहरी से बाहर
संसार का कोई रंग
मेरे हिस्से नहीं आता था।
मुझे चुनना था
बस
लाल, हरा या नीला,
जबकि मेरे भीतर
एक पूरा आकाश
निर्णय लेना चाहता था।
वे कहते थे
स्त्रियों को बहुत अधिकार हैं,
और मैं
अपनी ही देह पर
एक किनारी चुनते हुए
धीरे-धीरे अदृश्य होती जाती थी।