अपराजिता की हिन्दी साहित्य यात्रा में आपका स्वागत है ।
यात्राएं अनेक है किन्तु गंतव्य एक है। जाने अंजाने उस अनेक से एक की यात्रा पर हम सभी जा रहे है। आशा है कि आप अपराजिता की साहित्य यात्रा का हिस्सा बन हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने मे सहयोग प्रदान करेंगे। काव्य अपराजिता, हिन्दी साहित्य को समर्पित एक गैर व्यवसायिक वेबसाइट है । यह जीवन के अनुभव को हिन्दी साहित्य के रूप मे साझा करने का एक लघु प्रयास है । साहित्य मनुष्य की चेतना का प्रतिबिंब है । मनुष्य की चेतना जब शब्दों का रूप लेती है तो साहित्य की रचना होती है । साहित्य महज शब्दों की कारीगरी या कल्पना मात्र नहीं है, यह जीवन के विभिन्न अवसरों, परिस्थितियों में मनुष्य के संघर्ष, उल्लास, पीड़ा एवं प्रेम की अभिव्यक्ति है ।
लाश में अटकी आत्मा
डॉ अशोक चक्रधर आत्मा अटकी हुई थी लाश में,लोग जुटे थे हत्यारे की तलाश में।सबको पता था कि हत्यारा कौन था,लाश हैरान थी कि हर कोई मौन था।परिवार के लोगों
कम से कम
डॉ अशोक चक्रधर एक घुटे हुए नेता नेछंटे हुए शब्दों मेंभावुक तकरीर दी,भीड़ भावनाओं से चीर दी।फिर मानव कल्याण के लिएदिल खोल दान के लिएअपनी टोपी घुमवाई,पर अफ़सोसकि खाली लौट
कामना
डॉ अशोक चक्रधर सुदूर कामनासारी ऊर्जाएंसारी क्षमताएं खोने पर,यानि किबहुत बहुतबहुत बूढ़ा होने पर,एक दिन चाहूंगाकि तू मर जाए।इसलिए नहीं बतायाकि तू डर जाए। हां उस दिनअपने हाथों सेतेरा संस्कार




