अपराजिता की हिन्दी साहित्य यात्रा में आपका स्वागत है ।
यात्राएं अनेक है किन्तु गंतव्य एक है। जाने अंजाने उस अनेक से एक की यात्रा पर हम सभी जा रहे है। आशा है कि आप अपराजिता की साहित्य यात्रा का हिस्सा बन हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने मे सहयोग प्रदान करेंगे। काव्य अपराजिता, हिन्दी साहित्य को समर्पित एक गैर व्यवसायिक वेबसाइट है । यह जीवन के अनुभव को हिन्दी साहित्य के रूप मे साझा करने का एक लघु प्रयास है । साहित्य मनुष्य की चेतना का प्रतिबिंब है । मनुष्य की चेतना जब शब्दों का रूप लेती है तो साहित्य की रचना होती है । साहित्य महज शब्दों की कारीगरी या कल्पना मात्र नहीं है, यह जीवन के विभिन्न अवसरों, परिस्थितियों में मनुष्य के संघर्ष, उल्लास, पीड़ा एवं प्रेम की अभिव्यक्ति है ।
मुनीश्वर दत्त उपाध्याय AI Based imaginary Image पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्याय: बेल्हा के मालवीय, भारत माँ के सच्चे सपूतभारतीय स्वाधीनता संग्राम के अनाम नायकों में एक प्रखर नाम है—पंडित मुनीश्वर
युवराज लाल प्रताप सिंह AI Based imaginary Image 1857 की क्रांति भारतवर्ष की वह ज्वालामुखी थी, जिसमें हर जाति, धर्म और क्षेत्र के लोगों ने अपनी आहुति देकर उसे जनक्रांति
कोतवाल धन सिंह गुर्जर AI Based imaginary Image भारत के स्वाधीनता संग्राम का इतिहास अनेक वीरों की गाथाओं से सुशोभित है, परंतु जब भी 1857 की प्रथम स्वतंत्रता क्रांति का
न चुप रह के दे यूँ सज़ा ज़िन्दगीसबब बेरुख़ी का बता ज़िन्दगी। न कर रात-दिन यूँ दग़ा ज़िन्दगीकभी तो किया कर वफ़ा ज़िन्दगी। न ख़्वाबों में दिन यूँ बिता ज़िन्दगीहक़ीक़त
सचाई थी कोई क़िस्सा नहीं थावो मेरा था मगर मेरा नहीं था। इसी से जीत के रास्ते खुले थेवो हारा था मगर टूटा नहीं था। मिली बस्ती तो कुछ-कुछ था
रेशमी घटाओं में चाँद मुस्कराता हैनर्म-नर्म ख़्वाबों को नींद से जगाता है। चाँदनी सँवरती है आसमाँ के आँगन मेंसर्द झील का पानी आईना दिखाता है। मनचली हवाओं से पूछता है




