अपराजिता की हिन्दी साहित्य यात्रा में आपका स्वागत है ।
यात्राएं अनेक है किन्तु गंतव्य एक है। जाने अंजाने उस अनेक से एक की यात्रा पर हम सभी जा रहे है। आशा है कि आप अपराजिता की साहित्य यात्रा का हिस्सा बन हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने मे सहयोग प्रदान करेंगे। काव्य अपराजिता, हिन्दी साहित्य को समर्पित एक गैर व्यवसायिक वेबसाइट है । यह जीवन के अनुभव को हिन्दी साहित्य के रूप मे साझा करने का एक लघु प्रयास है । साहित्य मनुष्य की चेतना का प्रतिबिंब है । मनुष्य की चेतना जब शब्दों का रूप लेती है तो साहित्य की रचना होती है । साहित्य महज शब्दों की कारीगरी या कल्पना मात्र नहीं है, यह जीवन के विभिन्न अवसरों, परिस्थितियों में मनुष्य के संघर्ष, उल्लास, पीड़ा एवं प्रेम की अभिव्यक्ति है ।
घाव बड़े गहरे
डॉ अशोक चक्रधर गुलगुलशनगुलफ़ाम कहां!हम तोग़ुलाम ठहरे!!हाकिमबहरे के बहरे!!! किसके आगे दिल को खोलें,कौन सुनेगा किस को बोलें,किसे सुनाएं कड़वा किस्साबांटे कौन दर्द में हिस्सा? कहने भर को लोकतंत्र है,यहां
सुनामी
डॉ अशोक चक्रधर बहुत पहले बहुत पहले बहुत पहले से भी बहुत पहले इस असीम अपार अन्तरिक्ष में घूमती विचरती हमारी धरती बड़े बड़े ग्रह नक्षत्रों के लिए एक नन्हा
मेमने ने देखे जब गैया के आंसू
डॉ अशोक चक्रधर माता पिता से मिला जब उसको प्रेम ना,तो बाड़े से भाग लिया नन्हा सा मेमना।बिना रुके बढ़ता गया, बढ़ता गया भू पर,पहाड़ पर चढ़ता गया, चढ़ता गया




