प्रदीप खांडे

प्रदीप खांडे एक संवेदनशील और जागरूक युवा कवि हैं, जिनका जन्म मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक नगर महेश्वर के समीप स्थित ग्राम पिपल्या हाना (जिला इन्दौर) में हुआ। इन्हें बचपन से ही साहित्य और विशेष रूप से कविता लेखन में रुचि रही है।इन्होंने गणित विषय में स्नातक (बी.एससी) की शिक्षा प्राप्त की है, लेकिन गणित की सटीकता और कविता की भावुकता का अनूठा संगम इनके व्यक्तित्व में साफ झलकता है।प्रदीप खांडे का मानना है कि आज का युवा अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक चेतना से दूर होता जा रहा है। उनका स्पष्ट संदेश है कि –
“आज के युवा गौरवमयी इतिहास को भुला रहे हैं। उन्हें अपना इतिहास पढ़ना चाहिए।”
वे चाहते हैं कि नई पीढ़ी अपने अतीत से जुड़े, अपने पुरखों के संघर्षों को समझे, और राष्ट्र की जड़ों से जुड़े मूल्यों को अपनाए।कविता लेखन उनका न सिर्फ शौक है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने और भावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम भी है। उनकी कविताओं में देशभक्ति, संवेदना, सामाजिक प्रश्न और आत्मचिंतन की गहराई देखने को मिलती है।प्रदीप खांडे जैसे युवा साहित्यकार वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को भी जीवित रखे हुए हैं।

प्रदीप खांडे की रचनाएं