हम चुभने वाले लोग नये साल भी चुभेंगे
हम चुभने वाले लोग नये साल भी चुभेंगे
ना खुस-फुस करेंगे
ना कोई चाल चलेंगे
ना होंठो के चाप पर व्यंग धर कर हँसेंगे
स्पष्ट वक्ता थे स्पष्ट वक्ता ही रहेंगे
तुम्हारे मन में गड़ेंगे तुम्हारी नज़रों में चुभेंगे
हम चुभने वाले लोग नये साल भी चुभेंगे।
तुम सच ना कहना
हम झूठ ना कहेंगे
तुम दायें बायें चलना
हम सरपट चलेंगे
जो तुम बहकना तो हमसे सहारा माँग लेना
हम जो बहके तो तुम्हारे कपट में फसेंगे
फँस कर जो निकले फिर हर कपट पर हँसेंगे
हम चुभने वाले लोग नए साल भी चुभेंगे।
निम्न स्तर की सोच
ऊँचे मुक़ाम कब गढेगी
तुम्हारे अड्डे की रणनीति
अड्डे तक सीमित रहेगी
सकारात्मकता की बंसी बजा तुम नकारे काम करना
नकारात्मकता के बादल पर हम कर्मों की पंखी झलेंगे
पर वादा है कभी कोई द्वंद ना रचेंगे
अपराजित थे अपराजित रहेंगे
हम चुभने वाले लोग हर साल ही चुभेंगे।
साल बदलने से चाल कब बदलती है
तुम भी ना बदलोगे
हम भी ना बदलेंगे
तुम गिर कर फिर गिरना
हम गिर-गिर कर उठेंगे
हम चुभने वाले लोग हर साल ही चुभेंगे।
नववर्ष आप सभी के लिये मंगलमय हो !!
