प्रियतम मोरे कान्हा

तुम सामने मेरे हो और देखा में तुझे करूँ
कि मुस्कुराओ तुम मुझे देख कर और नजरें मेरी नीची हो
कि आखों में तेरी खो जाऊँ मैं, बाते तेरी इतनी प्यारी हो
और रंग में तेरे संग होली खेलूं मैं,
पर रंग पर नाम सिर्फ मेरा हो
जब सावन आए प्रितम मोरे मुझे से मिलने आए
संग में अपने मुरली लाए
कदमों की आहट सुन के उनकी भाग कर मैं आऊँ
रात चांदनी एसी हो चेहरे पर सजती तेरी मुस्कान जैसी हो
मैं दिवानी तेरी मुस्कान की ऐसी होऊं
तुम श्याम मेरे मैं राधा तेरी होऊं।
हाथों की चुड़ियाँ ऐसी हों
चेहरे पर तेरे नूर सजता हो
मैं सजा लू माँग नाम की तेरी
हाथ में हाथ मेरा तेरे हो।
मैं लाऊ खाना तेरे लिए
पर तुम हमझोली संग माखन खाए
मैं सखियों संग जाऊँ घाट पर पानी भरने
तुम टोली अपनी संग में लेके मटकी मोरी फोड़ो
तुम गोपियों संग संग रास रसाये कान्हा की तरह
और मैं रूठ जाया करू राधा की तरह
मैं राधा कि तरह मानु तुझको ही सिर्फ अपना
तुम मुझे कान्हा की तरह मनाया करो
प्रियतम मोरे कान्हा॥