सम्हल जाओ अब पड़ोसी देश
सम्हल जाओ अब पड़ोसी देश
बहुत अनदेखा तुम्हें किया,
हमारी शराफत का तुमने,
नाजायज फायदा बहुत उठा लिया,
तुमने कभी घुसपैठी से,
हमारे देश में आतंक फैलाया,
कभी धोखे और बेईमानी से,
हमारी पीठ पर वार किया,
हैवानियत का गंदा खेल खेलकर,
तुमने इंसानियत का खून किया,
हमारे देश पर गर अब तुमने,
आँख उठाकर भी देखा,
तो तुमको न छोड़ेगें,
तुम जैसे शैतानों के हाथों,
अब और कहर न होने देंगे,
भारत का हर एक वासी,
फिर से अस्त्र उठाएगा,
तुम्हे हर एक हिंदुस्तानी में,
देशभक्त नजर आ जायेगा,
जो तुम्हारी पाप की लंका को,
फिर से आज जलायेगा,
रावण राज का अंत होगा,
विश्व में चैन और अमन छा जाएगा।।
