देश के ही गद्दार से

खतरा मंडरा रहा है देश पर, देश के ही गद्दार से,
लूट रहे खुलेआम देश को, अपनी षड्यंत्री चाल से।
अफरातफरी मची हुई है, बेचैनी का आलम है,
दहशत का बाजार गरम है, आतंक के हथियार से।

प्रजातंत्र की आड़ में, तानाशाही अग्रसर है,
राज्य पर संकट बना हुआ है, राजनीति के दलाल से।
वोट बैंक बनाने को दर दर वोट माँगते हैं,
राजनेता बनने पर फिर, ठेंगा दिखाते अभिमान से।

अपनी जेबें भरते है, किसी की फिक्र न करते हैं,
जनता पल पल मर रही है, मंहगाई की मार से।
चिंता नहीं है किसी को देश की, सब स्वयं में मग्न हैं,
भारत माँ की नम हैं आँखे, पाकर इन हालात में।

वीर सैनानी तने हुए हैं, बाहरी दुश्मन डरे हुए हैं,
सुरक्षित हैं देश की सीमा, इन सैनिकों की शहादत से,
भारत की आंतरिक शक्ति,भारत को ही लूट रही हैं,
मौन बैठें है भारतवासी, नहीं निकलते शब्द जुबां से।

देश के लिये जन जन को आगे आना है,
कर्तव्य पथ पर बढ़ो सब आगे, अपने स्वभिमान से,
भारत की अनेकता में ही इसकी एकता है,
दिखा दो पूरे विश्व को ये, आन-बान और शान से।।