दुनिया तेरे आगे

हर याद तेरी नींद से लड़ती है हर रात,
रुसवाई सी लगती है दुनिया तेरे आगे।

तू पास नहीं फिर भी सदा दिल में बसा है,
कुछ इस क़दर चलती है दुनिया तेरे आगे।

वो पहला तेरा नाम पुकारा था जो दिल ने,
अब हर दुआ जलती है दुनिया तेरे आगे।

तेरे बाद कोई और न आया मेरी राहों में,
बस तन्हा सी चलती है दुनिया तेरे आगे।

“जगमोहन” की शायरी भी अब ग़म से भरी है,
जब ग़ज़ल ये कहती है-“दुनिया तेरे आगे”।