गीतिका डॉ प्रिया सूफ़ी शाम मतवाली सुहानी, हो गई मनमीत लो,आज आलिंगन भरो तुम, बहकता मन जीत लो।है बरसता आज सावन, झूम कर आई हवा,सुर सजा है प्यार का अब, गा रही चंचल सभा,गुनगुना कर कुछ नया सा, अधर को तुम गीत दो…आज आलिंगन भरो तुम…!ओस की बूंदें सुहानी, फूल का मुख चूमती,मोर दादुर नाचते हैं, श्यामला भू झूमती,आज बरसो तुम झमाझम, खिल उठेगी प्रीत लो…आज आलिंगन भरो तुम…!चांदनी निखरी गगन में, याद का आँगन खिला,ओढ़ धानी सी चुनरिया, मन मयूरा यूं मिला,मत सताओ और मुझको, प्रीत का संगीत दो…!आज आलिंगन भरो तुम…!