वक्त मिला तो
वक्त मिला तो इश्क़-ए-रूबरू करा देंगे,
इश्क़-ए-राह में जल्दबाजी अच्छी नही लगती।
सब्र हो तो इश्क़-ए-रोग लगा लो तुम,
बेसब्री इश्क़ में अच्छी लगती नही।
वफ़ा निभा सकते हो जो तुम इश्क़ में तो कर,
बेवफ़ाई इश्क़ में हर वक़्त अच्छी नही लगती।
हाथ पकड़ा है तो आंखें भी मिला लेंगे,
महबूब से यूँ आंखमिचोली अच्छी नही लगती।
इश्क़ है उनको भी तो गले लगायेंगी,
इश्क़ में दूरियाँ ‘मनोज़’ अच्छी नही लगती॥
