तक़दीर में थे तुम सब, मेरी हर तस्वीर में तुम सब, मेरे मँझधार में तुम सब, मेरे डगर में तुम सब, यूँ तल्खियाँ किसी काम की नहीं, मेरे हर दिन में तुम सब, बहुत हो गया दुनिया के जंजाल में, मेरी खुशियों का पैमाना तुम सब, चली मिलते हैं फिर हम सब, साथ ही है हम सब, ऐ दोस्त।।