लगे सूरत शिकारी

लगे सूरत शिकारी
तो कर सीरत से यारी।

बचे कैसे जहां से
जवां बिरहा की मारी।

फ़क़त मुफ़लिस को लूटें
ये मंदिर के पुजारी।

जो तेरा ग़म न समझे
उसी पर अश्कबारी।

हमारे काम आई
हमारी ख़ाक़सारी।