अगर पास हक़ की क़माई नहीं है बलजीत सिंह 'बेनाम' अगर पास हक़ की क़माई नहीं हैअभी प्यास तुमने बुझाई नहीं है।ये सोचा ख़ुदा से उसे छीन लाऊँमगर ऐसी तक़दीर पाई नहीं है।जहाँ पर फ़क़त राज़ शैतां का होगाजहाँ में सुकूँ मेरे भाई नहीं है।घटा ग़म की बरसी मेरे दिल में ही बसघटा ग़म की अम्बर पे छाई नहीं है।क़लम से दिया अम्न सारे जगत कोक़लम से तबाही मचाई नहीं है।