तसव्वुर में चेहरा निहारा बहुत है बलजीत सिंह 'बेनाम' तसव्वुर में चेहरा निहारा बहुत हैये दिल तो मोहब्बत का मारा बहुत है।कभी पास आई नहीं ज़िंदगानीउसे दूर ही से पुकारा बहुत है।ज़मी कोई छीने अगर ज़ब्र से तोमुझे आसमां का सहारा बहुत है।किसी फ़ैसले की मैं तह तक न पहुँचाकई बार सोचा विचारा बहुत है।जहां की तबाही के मंज़र को यारों सनम की नज़र का शरारा बहुत है।