दो दिलों को क़रीब आना है बलजीत सिंह 'बेनाम' दो दिलों को क़रीब आना हैचाय का कप तो इक बहाना है।बेक़सूरों की भीड़ ने पूछादार पर अब किसे चढ़ाना है।ऐब तो सारे है इसमें फिर भीलोग कहते बड़ा घराना है।राह के पत्थरों से है सीखाठोकरें खा के भी मुस्कुराना है।बन मुकद्दर ज़िंदगी में आ जा तूआसमाँ सिर पे फिर उठाना है।