दो दिलों को क़रीब आना है

दो दिलों को क़रीब आना है
चाय का कप तो इक बहाना है।

बेक़सूरों की भीड़ ने पूछा
दार पर अब किसे चढ़ाना है।

ऐब तो सारे है इसमें फिर भी
लोग कहते बड़ा घराना है।

राह के पत्थरों से है सीखा
ठोकरें खा के भी मुस्कुराना है।

बन मुकद्दर ज़िंदगी में आ जा तू
आसमाँ सिर पे फिर उठाना है।