जीने का हक

है जीने का हक
मुझे भी,
चलना मेरा जड़ से है
दर्द होता है
मुझे भी,
क्यों कर रहे हो
अंत मेरा।

बनाता हूँ
हरा भरा रूप
इस प्रकृति का
मैं रोकता हूँ
प्रदूषण को
जलती धूप में
छाया बनाता
मैं एक पेड़ हूँ।

बिगाड़ा क्या
तुम्हारा मैंने,
कर रहे हो जो
अंत मेरा।

मत करो
नष्ट मुझे,
सांस लेने में होगा
कष्ट तुझे।