हाल है दिल का जो क्या बताएँ तुझे मुहम्मद आसिफ अली हाल है दिल का जो क्या बताएँ तुझेशाम में भी फ़ना की तरह हम जिए।आज रुख़्सत तिरे साथ की रात हैचल पड़े आज तन्हा फ़ज़ा हम लिए।दूर होने लगा ये नशा और भीचल पड़े आज ख़्वाब-ए-सहर हम लिए।रास्ता हो यहाँ और साहिल वहाँफिर चलेंगे रवा में असर हम लिए।बात करने जहाँ आज ‘आसिफ़’ मिलेहाल लेकर चले कुछ पहर हम लिए॥