बार बार नहीं बस ये अंतिम बार है ज़िंदगी रोकर नहीं हँसकर गुज़ार सत्कार है ज़िंदगी पल पल जीना मरना धिक्कार है ज़िंदगी कुछ कर गुजर नहीं तो दुश्वार है ज़िंदगी चंद साँसों की तेरी तलबगार है ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी ले बेशुमार है ज़िंदगी घुट-घुट कर जिया तो तिरस्कार है ज़िंदगी दीन दुखी को दे मुस्कान तो पुरस्कार है ज़िंदगी दुनिया है संगदिल बस चाहरदीवार है ज़िंदगी तेरी मौत पर जमाना रोए तो परिवार है ज़िंदगी।