मत मानो न परंपरा को, न भीड़ को, न गुरु के शब्दों को। मनुष्य का सबसे बड़ा अनर्थ अपरिक्षित विश्वास है। जो सुनो उसे अपनी चेतना की धूप में रखकर देखो क्या वह पिघलता है या उजाला बनता है? सत्य आदेश से नहीं, अनुभव से जन्म लेता है। परख ही स्वतंत्रता का पहला द्वार है।