समय का मौन संदेश
समय अपना कहा कभी ऊँची आवाज़ में नहीं कहता।
वह बस गुजरता है
घड़ी की सुइयों की तरह नहीं,
अंदर किसी अनकहे परिवर्तन की तरह।
आज जो रास्ता रुका हुआ लगता है,
वह वास्तव में हमें रोककर
कुछ दिखाना चाहता है—
शायद कोई भूल,
शायद कोई छूटा हुआ संकेत,
या शायद कोई ऐसा मोड़
जिसकी ओर हम देखने का साहस नहीं कर पा रहे थे।
हर ठहराव एक पुस्तक है,
जिसकी भाषा धीरे-धीरे खुलती है।
हर देरी एक दर्पण,
जो हमें हमारी ही दिशा दिखाता है।
समय हमारे खिलाफ नहीं होता
वह सिर्फ हमारे भीतर
गति और धैर्य के संतुलन को साध रहा होता है।
हम जितना उसके प्रवाह को सुनना सीख लेते हैं,
उतना ही वह हमारे पक्ष में बोलने लगता है।
समय चुप है,
पर उसका मौन ही सबसे स्पष्ट संदेश है
कि हर परिवर्तन अपने ठीक क्षण में आता है,
और हर दिशा,
ठीक उसी समय खुलती है
जब हम उसे देखने के लिए तैयार होते हैं।
