जरा याद करो कुर्बानी

भूल गए क्यों उन वीरों को, जरा याद करो कुर्बानी,
मिट् गए जो देश की खातिर हो गए अमर बलिदानी !!

इक था नाम वीर सुभाष, सुन गोरे घबराते थे,
सुनकर के ललकार जिसकी दुश्मन थर्राते थे,
देश विदेश में जाकर जिसने लोहा अपना मनवाया ,
आजाद हिन्द फौज बनाकर अंग्रेजो को चौंकाया,
हिटलर ने भी जिसकी ताकत को दी सलामी,
भारत माता के सच्चे सपूत थे वो अभिमानी !!
भूल गए क्यों उन वीरों को, जरा याद करो कुर्बानी,
मिट् गए जो देश की खातिर हो गए अमर बलिदानी !!

नाम सुना आजाद सबने भारत माँ का लाल,
चंद्रशेखर ने अंग्रेजों का किया बुरा था हाल,
देश भक्त था इतना सच्चा बचपन में कोड़े खाए,
बन्दे मातरम का नारे फिर भी हँसते-हँसते गाए,
गोरों के संग लड़ते-लड़ते अपनी जान गंवा दी
झुकने न दी मां की शान था ऐसा अभिमानी!!
भूल गए क्यों उन वीरों को, जरा याद करो कुर्बानी,
मिट् गए जो देश की खातिर हो गए अमर बलिदानी !!

राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह नाम हर कोई जाने,
भारत माँ के सच्चे सपूत थे, ये बच्चा बच्चा जाने,
अपने देश की आन की खातिर चढ़ गए फाँसी फंदे
हँसते हँसते जान गवां दी भई कैसे थे तो वो बन्दे ,
छक्के छुड़ा दिए अंग्रेजों के याद दिला दी नानी
कर दी देश के नाम जिन्होंने अपनी भरी जवानी !!
भूल गए क्यों उन वीरों को, जरा याद करो कुर्बानी,
मिट् गए जो देश की खातिर हो गए अमर बलिदानी !!

किसी ने अपनी जान गँवाई किसी ने जीवन सारा,
कोई लड़ा था बंदूकों से, कोई ले लाठी का सहारा,
कोई रहा बंद जेलों में किसी ने अभियान चलाया,
अँग्रेजों से देश छुडाने कलम को हथियार बनाया,
आज़ादी की दुल्हन सज़ाने निकली जनता सारी,
माँ बहनों भी निकल पडी घर से, देने को कुर्बानी !!
भूल गए क्यों उन वीरों को, जरा याद करो कुर्बानी,
मिट् गए जो देश की खातिर हो गए अमर बलिदानी !!

जात धर्म को ताक पे रखकर देश प्रेम अपनाओ,
बहुत महँगी है अपनी आजादी यूँ मत इसे गंवाओ,
कितनी माँ बहनों ने खोए अपने सुहाग और राखी,
कितनों वंश मिट गये जिनका रहा न कोई बाकी,
तब जाकर मिली हमें ये फुल जीने की आजादी,
करता है अरदास धर्म की तुम न भूलोगे ये कहानी !!
भूल गए क्यों उन वीरों को, जरा याद करो कुर्बानी,
मिट् गए जो देश की खातिर हो गए अमर बलिदानी !!