ग़म-ए-गागर पुरानी फोड़ आए हम,

ग़म-ए-गागर पुरानी फोड़ आए हम,
गुमाँ लहरों का भी सब तोड़ आए हम!

तूफानों संग लड़ना बन गई आदत,
दिशा लहरों की यारों मोड़ आए हम !

फ़िज़ाओं ने फैलाया महकता आँचल,
गुलों ने जब पुकारा दौड़ आए हम !

डरायेगा भला कोई क्या हमको
कजा से आज रिश्ता जोड़ आए हम !

हमे अब डर नहीं लगता किसी ग़म से,
किनारे दुःख की कश्ती छोड़ आए है !!