ज़िन्दगी भर का साथ निभाने का वादा तो कर धर्मेंद्र कुमार निवातिया ज़िन्दगी भर का साथ निभाने का वादा तो कर,खुशी हो या ग़म सब कुछ आधा आधा तो कर !कब तक घूमता रहेगा यूँ तन्हा अकेला,मुझे हमसफ़र बनाने का इरादा तो कर !मिलकर बाँट लेंगे हर दुःख दर्द एक दूजे का,पकड़कर हाथों में हाथ सफर साझा तो कर !मिट जायेंगें सब दर्द-ओ-ग़म, वक्त बदलेगा,हिम्मत जरा पहले से, थोड़ी ज्यादा तो कर!अब तौर-तरीके बदल गए है दुनियादारी के,‘धरम’ तेरे जीने का ढंग सीधा तो सादा कर !!