ना तुम बदले, ना हम बदले धर्मेंद्र कुमार निवातिया ना खुशी बदली, ना ग़म बदले,ना दिन बदले, ना तम बदले !देखा जब पलटकर, ये पाया,बदले भी तो, कुछ कम बदले !इतना हेर-फेर देखा जीवन में,ना तुम बदले, ना हम बदले !चलते रहे एक ही पथ पर,अपनी ताल-कदम ना बदले !फासले बदले, ना हमसफ़र,बस राह ने कुछ कदम बदले !हर पल में देखा दौर नया,मुख बदले साथ करम बदले !बदलाव नियम है प्रकृति का,जो बदले कम से कम बदले!जीवन में इतना ख़्याल रहे जो भी बदले वो सम बदले !सपने देख ‘धरम’ ने पाया,दिल में पले कुछ भरम बदले !!