सुबह-सुबह बाबा नागार्जुन सुबह-सुबहतालाब के दो फेरे लगाएसुबह-सुबहरात्रि शेष की भीगी दूबों परनंगे पाँव चहलकदमी कीसुबह-सुबहहाथ-पैर ठिठुरे, सुन्न हुएमाघ की कड़ी सर्दी के मारेसुबह-सुबहअधसूखी पतइयों का कौड़ा तापाआम के कच्चे पत्तों काजलता, कड़ुवा कसैला सौरभ लियासुबह-सुबहगँवई अलाव के निकटघेरे में बैठने-बतियाने का सुख लूटासुबह-सुबहआंचलिक बोलियों का मिक्स्चरकानों की इन कटोरियों में भरकर लौटासुबह-सुबह।