डॉ मोहन लाल अरोड़ा

मै एक छोटा सा डाक्टर हमेशा मरीजों के दुख दर्द में रहा और उनकी सेवा मे लगा रहा बदले में मुझे बहुत सारा आशीर्वाद प्यार और धन के इलावा इज्जत और नाम भी मिला। समाज सेवा में जुड़े और सम्माननीय लोगों से मिलना हुआ, लिखने और बोलने का मौका मिला। जिसको मैने दिल से स्वीकार किया और कलम पकड़ कर अपने दिल से लिख डाला। आज आपलोगों के बीच एक कवि के रूप में हाजिर हूँ। दुख और दर्द से दिल का नाता है, इस लिए दर्द भरी रचना मन से लिखी जाती है। आप पसंद करते हैं तो हमारी कलम की धार भी तेज होती हैं और अपनी लेखनी को सफल बनाती है।

जीतो

जगजीत कौर…. प्यार से जीतो बुलाते, प्यार तो एक शब्द मात्र है बचपन से ही जीतो प्यार के लिए तरस गई। माँ का साया बचपन में उठ गया और बाप नशेड़ी शराबी और गरीबी का मारा अपने बच्चों पर ही एक तरह का बोझ था, जीतो की एक छोटी बहन और भाई था जिसका ध्यान भी जीतो ही रखती थी। जीतो जवान और खूबसूरत थी पर पढ़ी लिखी नही थी फिर भी एक प्राइवेट स्कूल मे साफ सफाई और सेवादार की छोटी सी नौकरी कर के अपने छोटे भाई बहन को पाल रही थी। जीतो बहुत खूबसूरत और समझदार थी। कभी भी लोगो की बातो पर ध्यान नही देती थी। शराबी बाप ने जीतो की शादी एक बड़ी उम्र के आदमी से कर दी…जीतो मना भी करती रही और रोती भी रही परंतु बाप ने एक ना सुनी…. …

बेचारी जीतो…..अपने ससुराल आ कर अपने पति और घर में ऐसी उलझ गई कि पता ही नही चला और तीन बरस बीत गए और एक बेटा भी पैदा हो गया…बीमारी की वजह से चल बसा। छोटे भाई बहन को अपने साथ ले आई….गरीबी मे अपने घर का गुजारा मुश्किल था…जिसके कारण छोटे भाई बहन के आने से घर मे क्लेश होने लगा। पति दिलीप उम्र में बड़ा अवश्य था परंतु जीतो को बहुत प्यार और सम्मान देता था। पैसो की तंगी की वजह से जीतो ने भी काम काज करने की सोची और स्कूल मे काम करने के लिए हाथ पैर मारे परंतु कामयाबी नहीं मिली आखिर मे एक ब्यूटीशियन से ब्यूटी पार्लर का काम सिखा और उसी के पास नौकरी करने लगी। भाई बहन भी बड़े हो गए और बेटा भी स्कूल जाने लगा। पढाई के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ती तो दोनों मियाँ बीबी मिल जुल कर पूरी कर लेते।

गाँव में सरपंच का लड़का सुक्खा हमेशा जीतो पर बुरी नज़र रखता और जीतो से बात करने की कोशिश करता… कभी कभी तो किसी बहाने से जीतो के घर भी आता परंतु जीतो कभी भी उसकी तरफ देखती तक नही थी और अपने काम में लगी रहती। सुक्खा हमेशा ही जीतो को पाने की कोशिश करता परंतु कामयाबी नही मिली तो जीतो के पति दिलीप को पटाने लगा कभी नशा कभी शराब और कभी मोटरसाइकिल पर शहर घुमाने लगा। शीघ्र ही दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। एक दिन सुक्खा शराब की बोतल लेकर जीतो के घर आ गया और दिलीप के साथ बैठ कर पीने लगा… नशे में आकर जीतो के साथ छेड़छाड़ करने लगा जीतो ने गुस्से में आकर घर से चले जाने को कहा… दिलीप भी सुक्खे के हक में बोलने लगा जिससे सुक्खे की हिम्मत बढ गई और जीतो का हाथ पकड़ कर कमरे में ले जाने लगा….जीतो ने हाथ छुड़ाया और शेरनी की तरह दहाड़ने लगी परंतु सुक्खा शराब और हवस के नशे में पागल,जीतो को दोनों हाथो से जकड़ लेता है और मेज पर गिरा देता है। दिलीप का भी नशा उतर जाता है और सुक्खे को पकड़ता है। सुक्खा दिलीप को धक्का देता है और फिर जीतो की तरफ भागता है… दिलीप गिर कर दीवार से भिड़ता है जिससे उसके माथे से खून आने लगता है । जीतो दिलीप की हालत देख पास पड़ी कुल्हाड़ी से सुक्खे पर वार करती है और सुक्खा खून से लथपथ जमीन पर गिर जाता है। जीतो के छोटे भाई बहन और बेटा सहमे हुए कभी दिलीप को देखते हैं तो कभी सुक्खे को तो कभी हाथ में कुल्हाड़ी पकड़े जीतो को……दिलीप जल्दी से उठ कर कुल्हाड़ी अपने हाथ में ले लेता है और जीतो को बच्चे सम्भालने के लिए कहता है। पूरे गांव में शोर मच जाता है… सुक्खे की अस्पताल जाते हुए मौत हो जाती हैं और दिलीप सारा इल्जाम अपने ऊपर ले लेता है और उसे जेल हो जाती है।

जीतो इन सबसे स्तब्ध हो जाती है कि अचानक से यह क्या हो गया …एक दम जैसे सब कुछ लुट गया हो… गाँववालों के तानो से तंग आकर शहर मे आकर ब्यूटी पार्लर का काम शुरू करती है फिर से घर को सम्हालती है। समय बीतता है और बच्चे बड़े हो जाते हैं… लड़का भी कालेज जाने लगता है। छोटे भाई बहन की शादी की भी चिंता और दिलीप के केस के लिए वकील का भी खर्च…. कभी कभी लोग पैसे का लालच देकर जिस्म खरीदने की कोशिश भी करते परन्तु जीतो अपने काम में अडिग और जीवन में कभी कमजोर नही पड़ती है। बाल सफेद हो गए परंतु खूबसूरती अभी भी कायम थी। जीतो के त्याग से छोटे भाई बहन की शादी हो गई और बेटा भी पढ लिख कर अफसर बन गया और दिलीप की भी सजा पूरी हो गई।