उषा की लाली बाबा नागार्जुन उषा की लाली मेंअभी से गए निखरहिमगिरि के कनक शिखर !आगे बढ़ा शिशु रविबदली छवि, बदली छविदेखता रह गया अपलक कविडर था, प्रतिपलअपरूप यह जादुई आभाजाए ना बिखर, जाए ना बिखरउषा की लाली मेंभले हो उठे थे निखरहिमगिरि के कनक शिखर !