बिना शब्द संवाद

अगर कभी लगे थका हुआ-सा,
साँसें भी बोझिल सी लगने लगें,
तब इतनी सी बात याद रखना 
राह जो धुंधली दिखे, ज़रूरी नहीं अधूरी हो।

मत छुपाना आसुओं को आँखों में,
उन्हें अश्रु बन बह जाने देना,
शब्द नहीं, ख़ामोशी भी पढ़ ले,
ऐसा कोई हमसाया जब ज़िंदगी में साथ हो।

जो सुन सके हर टूटा लफ़्ज़ भी,
ना सलाह दे, ना दे बस उपदेश ही,
ना केवल झूठी उम्मीदें ही बाँधे,
मगर हर मोड़ पे साथ चलने को तैयार हो।

कभी कुछ ग़लत सोचने भर से
दिल में उसके भी हो हलचल सी,
ऐसा अपना जब कोई साथ हो,
समझ लो, कुछ तो कशिश बाकी है जीने में।