संवाद का विवेक

क्षण भर ठहरो, फिर बोलो, सोच ज़रा परिणाम,
प्रतिक्रिया में होता बस, मन के भावों का तूफ़ान।

गुस्से में जो शब्द निकलते, लगे बरसती तलवार,
शांत रह जब कोई जवाब दे, पाए सबसे मान।

किसी की स्थिति में ज़रा, खुद को रखकर सोचो,
शब्दों का चयन हो सटीक, तभी मिले समाधान।

हर कहे शब्द अपने हों, न करो उधार लेकर वार,
संकट की घड़ी में रखो, ज़िम्मेदारी का ज़रा ध्यान।

सोच समझकर बोले बोल, हर शब्द बने पहचान,
भावनाओं में बह गए गर, खो सकते हो सम्मान।