हाँ और ना अनु महेश्वरी हर बात में हाँ न बोलो, हर बात में ना न बोलो।जब हो खफा, मुंह न खोलो, खुश हो, हवा में न बोलो।सच्चा हितैषी न कोई, सबको कभी सब न बोलो।मुद्दा न आए समझ तो, बढ़-चढ़ के फिर तुम न बोलो।रहता बदलता समय जो, कुछ भी कहीं भी न बोलो।बिगड़े बनी बात भी जो, संभल के गर तुम न बोलो।