हाँ और ना

हर बात में हाँ न बोलो,
हर बात में ना न बोलो।

जब हो खफा, मुंह न खोलो,
खुश हो, हवा में न बोलो।

सच्चा हितैषी न कोई,
सबको कभी सब न बोलो।

मुद्दा न आए समझ तो,
बढ़-चढ़ के फिर तुम न बोलो।

रहता बदलता समय जो,
कुछ भी कहीं भी न बोलो।

बिगड़े बनी बात भी जो,
संभल के गर तुम न बोलो।