लगे सूरत शिकारी बलजीत सिंह 'बेनाम' लगे सूरत शिकारीतो कर सीरत से यारी।बचे कैसे जहां सेजवां बिरहा की मारी।फ़क़त मुफ़लिस को लूटेंये मंदिर के पुजारी।जो तेरा ग़म न समझेउसी पर अश्कबारी।हमारे काम आईहमारी ख़ाक़सारी।