अपने चेहरे को आईना करके बलजीत सिंह 'बेनाम' अपने चेहरे को आईना करकेज़िंदगानी से जी वफ़ा करके।उम्र भर आँसुओं में डूबा हूँएक इंसान को ख़ुदा करके।आप आए नहीं जला दीपकसर्द रातों से इल्तज़ा करके।कर सभी का भला ज़माने मेंतू बुरा पाएगा बुरा करके।मुश्किलें और भी बढ़ाई हैंज़हर के पौधे को बड़ा करके।