होता है नूरानी मंज़र बलजीत सिंह 'बेनाम' होता है नूरानी मंज़रमेरे घर जब तुम आते हो।दर्पण कुछ बोले तो कैसेदर्पण से क्या कह जाते हो।मीठी बातों का विष तीखाइनको अमृत बतलाते हो।फूलों से खिल जाते हो तुमफूलों से ही मुरझाते हो।माँ के आँचल से बढ़कर क्यामाँ का आँचल ठुकराते हो।