तसव्वुर में चेहरा निहारा बहुत है

तसव्वुर में चेहरा निहारा बहुत है
ये दिल तो मोहब्बत का मारा बहुत है।

कभी पास आई नहीं ज़िंदगानी
उसे दूर ही से पुकारा बहुत है।

ज़मी कोई छीने अगर ज़ब्र से तो
मुझे आसमां का सहारा बहुत है।

किसी फ़ैसले की मैं तह तक न पहुँचा
कई बार सोचा विचारा बहुत है।

जहां की तबाही के मंज़र को यारों
सनम की नज़र का शरारा बहुत है।