दे सकेगा क्या किसी को वो ख़ुशी बलजीत सिंह 'बेनाम' दे सकेगा क्या किसी को वो ख़ुशीखौफ़ में जिसने बिताई ज़िन्दगी।सिर्फ़ कहने का तरीका है नयाबात कोई भी नहीं है अनकही।उम्र भर की शोहरतों का ये सिलासर छुपाने को नहीं छत आज भी।प्यास दुनिया की मिटाएगा कहाँइस समंदर की मिटी कब तिश्नगी।मैं तो आदत के मुताबिक़ हँस पड़ादास्ताँ गो आपकी थी दुःखभरी।