दे सकेगा क्या किसी को वो ख़ुशी

दे सकेगा क्या किसी को वो ख़ुशी
खौफ़ में जिसने बिताई ज़िन्दगी।

सिर्फ़ कहने का तरीका है नया
बात कोई भी नहीं है अनकही।

उम्र भर की शोहरतों का ये सिला
सर छुपाने को नहीं छत आज भी।

प्यास दुनिया की मिटाएगा कहाँ
इस समंदर की मिटी कब तिश्नगी।

मैं तो आदत के मुताबिक़ हँस पड़ा
दास्ताँ गो आपकी थी दुःखभरी।