टूटे हुए दिल में भी कोई रोशनी साँस लेती है, हार मान लेने पर भी उम्मीद चुपके से लौट आती है। जब दुनिया थका दे, आँखें धुंधली हो जाएँ, तो कोई भीतर से फुसफुसाए—“चल, मैं अभी भी तेरे साथ हूँ।” अँधेरों में डूबे पलों को भी भोर छू ही लेती है, थमे हुए सपनों की धड़कन फिर धीरे-धीरे जागती है। जीवन हर चोट के बाद एक नई दिशा रचता है, और बिखर कर भी इंसान फिर से पूरा हो जाता है।