ज़िन्दगी भर का साथ निभाने का वादा तो कर

ज़िन्दगी भर का साथ निभाने का वादा तो कर,
खुशी हो या ग़म सब कुछ आधा आधा तो कर !

कब तक घूमता रहेगा यूँ तन्हा अकेला,
मुझे हमसफ़र बनाने का इरादा तो कर !

मिलकर बाँट लेंगे हर दुःख दर्द एक दूजे का,
पकड़कर हाथों में हाथ सफर साझा तो कर !

मिट जायेंगें सब दर्द-ओ-ग़म, वक्त बदलेगा,
हिम्मत जरा पहले से, थोड़ी ज्यादा तो कर!

अब तौर-तरीके बदल गए है दुनियादारी के,
‘धरम’ तेरे जीने का ढंग सीधा तो सादा कर !!