मिली है नज़र तो मिलाकर के रखिए

मिली है नज़र तो मिलाकर के रखिए,
दिल-ऐ-आरज़ू को जगाकर के रखिए !

आएगा ऐसा भी कोई दिन होगा तुम्हारा,
नगर आस का बस बसाकर के रखिए!!

जाने कब हो जाये खुदा की इनायत,
ख्वाहिश जिगर की बनाकर के रखिए!

पड़ेगी जरूरत कभी ना कभी तो,
तुरप चाल इक्का दबाकर के रखिए!

होती है बड़ी खास अनमोल पूँजी,
यादों को सीने से लगाकर के रखिए!

बामुश्किल होता है इत्तेफ़ाक ऐसा,
ख्वाबों को दिल में सजाकर के रखिए!

सुनोगे जो दिल से सुनाई भी देगी,
सदाएं ‘धरम’ की बचाकर के रखिए!!