मै भुलाऊँ कैसे बता तुझे तेरा प्यार ही मेरी जिंदगी।
जो मिला न मुझको कभी यहाँ है उसी खुदा की बंदगी ।
बरसाते मोहब्बत भी मुझको न छू सकी जो दिया है तेरी वफा ने वो है उम्र भर की तिस्नगी।
अब तो हँसता है मेरा शहर भी मेरे इस मुकाम पर तुझे जानकार ऐ जानशीं मै बना रहा क्यों अजनबी ।
हर राह से मुझको तेरी ही याद आती है हर साँस मेरी, बस तेरा ही नाम दोहराती है । तू मेरी हकीकत, तू ही मेरा ख्वाब है कैसे बदल दूँ मैं ये अपनी ही दिललगी । मै भुलाऊँ कैसे बता तुझे तेरा प्यार ही मेरी जिंदगी ।