तुम्हारी याद का आलम निराला है

तुम्हारी याद का आलम निराला है
दिलों में बस तुम्हारा ही उजाला है। 

नज़र में तुम सजे हो हर तरफ़ से
ख़यालों में तुम्हारा ही मेला है। 

वो लम्हा जब मुलाक़ात हुई थी
दिलों का राग उस पल का नशीला है। 

तुम्हारी बात में जादू सा बंधा है
हर इक लफ़्ज़ तुम्हारा गीत-माला है। 

न जाने कैसे दिल को चैन आया
तुम्हारी एक झलक ही मरहला है।