चल पड़े हैं रोशनी के साथ हम जगमोहन गौतम 'मुसाफ़िर' चल पड़े हैं रोशनी के साथ हम,छोड़ आये आलसी सी बात हम।नींद को अब कह दिया अलविदा,सपनों के पीछे लगी है जात हम।काग़ज़ों पे अब उगेंगे फूल सब,कलम को दी है नई सौगात हम।“गौतम” अब खुद से वफ़ा कर ली है,क्यों न हों अब जीत की शुरुआत हम।