ग़लत राह जाना नहीं जगमोहन गौतम 'मुसाफ़िर' दिल की बातों को सबको सुनाना नहीं,ख़्वाब अपने कभी भी दिखाना नहीं।वो जो मीठा लगे, ज़हर भी हो सके,हर किसी पर यक़ीं यूँ जताना नहीं।जिसमें सच्चाई हो, वो ही बात कर,झूठ की आड़ में मुस्कुराना नहीं।चाँद से दिल को जोड़ा तो फिर याद रख,आसमाँ सा कोई पास आना नहीं।ख़ुद को खो कर भी हासिल न हो जो खुशी,उस तरह की तमन्ना सजाना नहीं।‘गौतम’ इस दिल को तन्हा ही रहने दो,अब किसी भी ग़लत राह जाना नहीं।