आहिस्ता आहिस्ता

तुम्हारी बेरुखी एक दिन हमारी जान लेलेगी
मिलेगी मौत की तुमको ख़बर आहिस्ता आहिस्ता।

अभी तारों से खेलो चांद की किरणों से इठलाओ
शहर तक डूब जाएगा कमर आहिस्ता आहिस्ता।

परेशां किस लिए बैठा, क़दम आगे बढ़ा ‘गौतम’,
मिलेगी तुझको भी मंज़िल मगर आहिस्ता आहिस्ता।