इश्क़ बस एक प्रतीक्षा

सदियों से तय-शुदा
महबूब संग-दिल,
ख़ुद-ग़रज़, बे-वफ़ा
जागती आंखों से
शब-ए-फ़िराक़ काटे
आशिक़ बा-वफ़ा
इश्क़ बस एक प्रतीक्षा ।

ये आशिक़ का मुक़द्दर है
या है फ़लसफ़ा
अनन्त-दुख में नए-नए
रूपकों कष्टों का इज़ाफ़ा
आम तजरबात से अलग
तकलीफ़-देह कैफ़ियत
दुःख भरा इल्तिज़ा
इश्क़ बस एक प्रतीक्षा ।

अधूरी बात छूटी रात का
सिर्फ़ इंतिज़ार
दीदार होता नहीं
अपने महबूब के लिए
आशिक़ को मिलती
तन्हाई और
अनंत प्रतीक्षा
इश्क़ बस एक प्रतीक्षा ।