पायल की छम छम डॉ लाल थदानी कहीं दूर से पायल की छम छम आवाज़ आईसुर ने संगीत से कहा ताल संभालने मैं आई।कहती रही चिंता मत करो तुम हवा मैं पुरवाईयहाँ जान पर बन आई झंकार दी नहीं सुनाई।सुर ताल गीत बिन अभ्यास मत छेड़ो भाईन अध्यात्म मिला उसे न योग साधना पाई।सुर बेसुर तान छेड़ी जिसे जैसी समझ आईन सुरों का संजोग बना न वो सरगम नज़र आई।