नहीं भूल पाता तुझको मैं पापा डॉ लाल थदानी नहीं भूल पाता तुझको मैं पापातेरी छत्र छाया का सुख और पाताकाश ये हो पाता, ओ पापा !विभाजन की त्रासदीपढ़ने पालने की झंझावतअंश भर न ले सकातेरी ये अदावततेरा सौम्य मुस्कराता चेहराआँखों को सदा सुहाताकाश मैं समझ पाता, ओ पापा !