कैसा हुआ सफर डॉ लाल थदानी जिंदगी का जाने यह कैसा हुआ सफरभाग रहा है हर इंसान क्यों बिना डगर।सरल सी दुनिया बन गई है मकड़जालमंजिल का पता नहीं भटक रहा दरबदर।सुख, सम्पदा, समृद्धि, सब धरा रह जाएगाक्यों दौड़ रहा बेतहाशा पसीने से तरबतर।खुदा तू बक्श रहमत तेरे नाखुदा बंदे परजो खुद को भूला न अपनों की खैर खबर।