माँ
माँ बड़ी अनमोल है
माँ का क्या मोल बताऊं !
माँ तो है प्रभु जननी,
क्यों तेरी मेरी जताऊं।
माँ पर जितना लिखना चाहूं,
लज्जाओं में उलझ जाऊं।
माँ भले एक लज्जा,
पूरी कायनात ग्रंथ में माँ।
माँ त्याग की प्रतिमूर्ति,
बाकी मोह माया भ्रम जानूं !
माँ का स्नेहिल स्पर्श,
ऐसा सुकून कैसे भुलाऊं !
माँ का वास्तविक जादू,
थपकी भुलाए न भुलाऊं !
माँ मेरी सांस मेरे आसपास,
जहाँ जहाँ जाऊं सुनाऊं।
माँ की लोरी जेहन में,
हजार गानों से है बेहतर
माँ दुःख सुख में ठंडी छांव है
सादर वंदन माँ वारी वारी जाऊं।
हर पल करते हैं तुझे याद मेरी माँ,
कृपा दृष्टि बनाए रखना है फरियाद मेरी माँ।
