मैं मनोज कुमार निषाद मैंइंसान नहींबहुरूपिया हूँ,दिल से कुछ औरदिमाग से कुछ औरआँखों से कुछ और,अपनों से कुछ औरगैरों से कुछ औरअकेले में कुछ और,भीड़ में कुछ और,मंदिर में कुछ औरघर में कुछ और,जिंदा हूँ तो कुछ औरमर जाऊं तो कुछ और,मैंइंसान नहीं,बहुरूपिया हूँ।